आचार्य दीपक घोष

आचार्य दीपक एक प्रतिष्ठित लेखक, समाज सुधारक एवं वैदिक विद्वान हैं। वे सनातन धर्म, वेद, उपनिषद और गीता के गहन अध्ययन एवं अनुसंधान के माध्यम से धर्म, संस्कृति और समाज को जागरूक बनाने का कार्य कर रहे हैं। उनकी लेखनी तार्किक, वैज्ञानिक और शास्त्र आधारित होती है, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है। उनके लेख एवं पुस्तकें समाज में नैतिकता, धर्म और मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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त्रिदोष और स्वास्थ्य: वात, पित्त, कफ संतुलन से पाएं रोगमुक्त जीवन

आयुर्वेद के अनुसार सम्पूर्ण स्वास्थ्य का आधार त्रिदोष – वात, पित्त, और कफ – के संतुलन में निहित है। चरक संहिता (सूत्रस्थान 1/57) में कहा गया है: “वायु: पित्तं कफश्चैव

What is Maya? By acharya deepak

संसार की सबसे रहस्यमयी अवधारणाओं में से एक है – माया। यह शब्द हर धार्मिक, दार्शनिक और आत्मबोध के मार्ग में सामने आता है। माया का अर्थ क्या है?क्या यह

दुख का मूल कारण क्या है वेदों की दृष्टि से सम्पूर्ण समाधान

यदि ईश्वर करुणामय है तो सृष्टि में इतना दुःख क्यों है? यह प्रश्न केवल आधुनिक चिंतन नहीं, अपितु ऋषियों, मुनियों, तत्त्वचिंतकों, और महान दार्शनिकों के मन में भी उत्पन्न हुआ

Vedic solution to stress, anxiety and depression

आज के युग में तनाव (Stress), चिंता (Anxiety) और डिप्रेशन (Depression) जीवन का हिस्सा बनते जा रहे हैं। नौकरी का दबाव, रिश्तों में असंतुलन, भविष्य की अनिश्चितता और सामाजिक अपेक्षाएं

महर्षि और ऋषि में अंतर

भारतीय वैदिक परंपरा में ज्ञान, तप और साधना के आधार पर ऋषियों को अलग-अलग श्रेणियों में बाँटा गया है। जब हम वेद, उपनिषद, दर्शन या महाकाव्य पढ़ते हैं तो अनेक

रात्रिकालीन आयुर्वेदिक दिनचर्या: आयुर्वेद के अनुसार

भारतीय ऋषियों ने जीवन को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने के लिए दिनचर्या (Daily Routine) और रात्रिचर्या (Night Routine) दोनों पर विशेष जोर दिया। जैसे दिन की अच्छी शुरुआत ऊर्जा

वैदिक जीवन प्रबंधन: स्वास्थ्य, परिवार, करियर और तनावमुक्त जीवन का सनातन मार्ग - Live Class

आज के आधुनिक युग में मनुष्य ने विज्ञान और तकनीक के माध्यम से अद्भुत प्रगति की है — लेकिन क्या सच में उसने शांति पाई है? जिस तेज गति से

सप्त लोकों का रहस्य: भौगोलिक भ्रम या चेतना का विज्ञान

भारतीय अध्यात्म में एक प्रश्न सदा से लोगों को उलझाता रहा है — “लोक” का अर्थ क्या है? क्या भूलोक, स्वर्लोक, महर्लोक जैसे लोक कोई आकाशीय ग्रह हैं? या ये

गुरु-शिष्य परंपरा और गुरुकुल

भारतवर्ष की पहचान सदैव उसके ज्ञान और संस्कृति से रही है। इस पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने में गुरु-शिष्य परंपरा का सबसे बड़ा योगदान है। सनातन धर्म में ज्ञान केवल

धर्मविहीन राजनीति के दुष्परिणाम

भारतवर्ष की राजनीति सदैव धर्म से पोषित रही है। ‘धर्म’ केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन पद्धति और नीति का आधार है। जब राजनीति से धर्म अलग होता है, तब सत्ता

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