मंत्र, तंत्र और यंत्र का वास्तविक इतिहास और वैदिक विश्लेषण
आज यदि किसी व्यक्ति से पूछा जाए कि मंत्र क्या है?, तो सामान्यतः तीन प्रकार के उत्तर मिलते हैं— लेकिन […]
आज यदि किसी व्यक्ति से पूछा जाए कि मंत्र क्या है?, तो सामान्यतः तीन प्रकार के उत्तर मिलते हैं— लेकिन […]
भारत सहित विश्व की अनेक संस्कृतियों में “बुरी नज़र” (Evil Eye) की मान्यता हजारों वर्षों से प्रचलित है। यदि कोई
आज के समय में सनातन धर्म को लेकर जितनी चर्चाएँ होती हैं, उतनी ही भ्रान्तियाँ भी फैलाई जाती हैं। कुछ
आज के समय में बहुत से लोग प्रश्न करते हैं कि —“क्या शिखा (चोटी) रखना केवल अंधविश्वास है?”“क्या वेदों में
मनुष्य की उत्पत्ति का प्रश्न केवल आधुनिक विज्ञान का नहीं है। यह प्रश्न वेदों, उपनिषदों और भारतीय दर्शनों में अत्यंत
भारतीय वैदिक परंपरा के अनेक विषय ऐसे हैं जिन्हें आज के समय में आधे ज्ञान और आधुनिक नैतिक दृष्टि से
ग्रहण (Eclipse) शब्द सुनते ही रहस्य, उत्सुकता और अनेक मान्यताएँ हमारे मन में उमड़ने लगती हैं। भारतीय परंपरा में ग्रहण
मनुष्य कर्मशील है। कर्म करते हुए वह या तो धर्मपथ पर चलता है या अधर्म की ओर भटक जाता है।
भारतीय समाज में “शूद्र” शब्द को लेकर सबसे अधिक भ्रांतियाँ फैली हुई हैं। आम जनमानस में यह धारणा बना दी
भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में “देवता” शब्द का अत्यंत गहरा और वैज्ञानिक महत्व है। प्रायः लोगों के मन में
मानव जीवन कर्मप्रधान है। प्रत्येक क्षण हम कर्म करते हैं—चाहे वह शारीरिक हो, मानसिक हो या वाचिक। वेद, उपनिषद, गीता,
वर्तमान हिन्दू समाज की सबसे लोकप्रिय धारणा में ब्रह्मा, विष्णु और शिव को सृष्टि के तीन अलग-अलग देवता माना जाता