संसार की सबसे रहस्यमयी अवधारणाओं में से एक है – माया। यह शब्द हर धार्मिक, दार्शनिक और आत्मबोध के मार्ग में सामने आता है। माया का अर्थ क्या है?क्या यह
संसार की सबसे रहस्यमयी अवधारणाओं में से एक है – माया। यह शब्द हर धार्मिक, दार्शनिक और आत्मबोध के मार्ग में सामने आता है। माया का अर्थ क्या है?क्या यह
आज के आधुनिक युग में मनुष्य ने विज्ञान और तकनीक के माध्यम से अद्भुत प्रगति की है — लेकिन क्या सच में उसने शांति पाई है? जिस तेज गति से
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – सनातन जीवन दर्शन का आधार सनातन धर्म में जीवन को केवल एक सांसारिक यात्रा नहीं, बल्कि एक उद्देश्यपूर्ण और दिव्य प्रक्रिया माना गया है।
मानव जीवन में भावनाएँ और वासनाएँ स्वाभाविक हैं, किंतु जब ये अनियंत्रित हो जाती हैं, तो व्यक्ति आध्यात्मिक दृष्टि से पतन की ओर अग्रसर हो जाता है। सनातन वैदिक धर्मग्रंथों
ऋग्वेद में सूर्य को ब्रह्मांड का नेत्र कहा गया है – जो प्राणदायक भी है और अंधकार का संहारक भी। सूर्य केवल एक खगोलीय पिंड नहीं है, बल्कि यह जीवन,
मनुष्य के जीवन में धर्म और अधर्म दो ऐसे पथ हैं जो प्रत्येक क्षण निर्णय की कसौटी पर उसे खड़ा करते हैं। धर्म का मार्ग प्रायः कठिन प्रतीत होता है—संयम,
सनातन धर्म अत्यंत व्यापक और गूढ़ दर्शन से युक्त है, जिसमें साधना के अनेक मार्ग उपलब्ध हैं। हर व्यक्ति अपनी प्रवृत्ति, संस्कार, और जीवन-परिस्थितियों के अनुसार साधना का चयन करता
योग, एक प्राचीन भारतीय परंपरा है जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए अद्वितीय प्रणाली प्रदान करती है। योग का मूल उद्देश्य आत्म-साक्षात्कार और मन की चंचलता को समाप्त
सनातन धर्म और आयुर्वेद में “पंचमहाभूत” का विशेष महत्व है। पंचमहाभूत—आकाश, वायु, अग्नि, जल, और पृथ्वी—सृष्टि के निर्माण के मूल तत्त्व हैं। इन तत्त्वों से न केवल यह ब्रह्मांड बना
वाणी, मनुष्य की सबसे महत्वपूर्ण शक्तियों में से एक है। यह केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे विचार, भावनाएँ, और व्यक्तित्व का प्रतिबिंब है। हमारे प्राचीन शास्त्रों में वाणी







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Arvind Mukherjee: Extremely good and well analysed write up
Arvind Mukherjee: Good clarification
Amit vyas: आपके कार्य को नमन गुरुजी🙏