भारत में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च माना गया है। भारतीय संस्कृति में गुरु केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक और आत्मबोध का मार्गदर्शक है। प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास
भारत में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च माना गया है। भारतीय संस्कृति में गुरु केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक और आत्मबोध का मार्गदर्शक है। प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास
आज यदि किसी व्यक्ति से पूछा जाए कि मंत्र क्या है?, तो सामान्यतः तीन प्रकार के उत्तर मिलते हैं— लेकिन वैदिक साहित्य इनमें से किसी भी परिभाषा को पूर्ण रूप
भारत सहित विश्व की अनेक संस्कृतियों में “बुरी नज़र” (Evil Eye) की मान्यता हजारों वर्षों से प्रचलित है। यदि कोई बच्चा अचानक बीमार पड़ जाए, व्यापार में अचानक हानि हो
आज भारत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने “वास्तु शास्त्र” का नाम न सुना हो। घर बनाते समय वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेना, दुकान खोलने से पहले दिशा
आज के समय में सनातन धर्म को लेकर जितनी चर्चाएँ होती हैं, उतनी ही भ्रान्तियाँ भी फैलाई जाती हैं। कुछ लोग बिना वेदों का अध्ययन किए सनातन धर्म को केवल
प्रत्येक माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा बुद्धिमान, आत्मविश्वासी, संस्कारी और जीवन में सफल बने। अधिकांश माता-पिता बच्चे की शिक्षा पर तो ध्यान देते हैं, परंतु मानसिक विकास
आज के समय में बहुत से लोग प्रश्न करते हैं कि —“क्या शिखा (चोटी) रखना केवल अंधविश्वास है?”“क्या वेदों में शिखा रखने का आदेश है?”“आखिर ऋषि-मुनि चोटी क्यों रखते थे?”
आज के समय में एक अत्यंत चर्चित प्रश्न है— “क्या वेदों में आधुनिक Science और Technology का ज्ञान था?” कुछ लोग दावा करते हैं कि वेदों में पहले से ही
आज का युग “Information Age” कहलाता है। इंटरनेट, AI, मोबाइल और सोशल मीडिया के कारण जानकारी का विस्फोट हो चुका है। आज किसी भी विद्यार्थी के पास हजारों पुस्तकों से
प्रस्तावना: जीवन को समझने का सही दृष्टिकोण मानव जीवन जितना सरल दिखाई देता है, उतना ही जटिल है। हम रोज़ अपने जीवन में अनेक घटनाओं का अनुभव करते हैं—कभी सफलता,







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Amit vyas: आपके कार्य को नमन गुरुजी🙏