आचार्य दीपक घोष

आचार्य दीपक एक प्रतिष्ठित लेखक, समाज सुधारक एवं वैदिक विद्वान हैं। वे सनातन धर्म, वेद, उपनिषद और गीता के गहन अध्ययन एवं अनुसंधान के माध्यम से धर्म, संस्कृति और समाज को जागरूक बनाने का कार्य कर रहे हैं। उनकी लेखनी तार्किक, वैज्ञानिक और शास्त्र आधारित होती है, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है। उनके लेख एवं पुस्तकें समाज में नैतिकता, धर्म और मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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सनातन धर्म की 10 सबसे बड़ी भ्रान्तियाँ (Misconceptions)– वेदों के अनुसार वास्तविक सत्य

आज के समय में सनातन धर्म को लेकर जितनी चर्चाएँ होती हैं, उतनी ही भ्रान्तियाँ भी फैलाई जाती हैं। कुछ लोग बिना वेदों का अध्ययन किए सनातन धर्म को केवल

Bachho ka mansik vikas kaise kare

प्रत्येक माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा बुद्धिमान, आत्मविश्वासी, संस्कारी और जीवन में सफल बने। अधिकांश माता-पिता बच्चे की शिक्षा पर तो ध्यान देते हैं, परंतु मानसिक विकास

shikha bandhan vedic gurukul

आज के समय में बहुत से लोग प्रश्न करते हैं कि —“क्या शिखा (चोटी) रखना केवल अंधविश्वास है?”“क्या वेदों में शिखा रखने का आदेश है?”“आखिर ऋषि-मुनि चोटी क्यों रखते थे?”

क्या वैदिक ज्ञान आधुनिक Engineering और Technology का बीज रूप है

आज के समय में एक अत्यंत चर्चित प्रश्न है— “क्या वेदों में आधुनिक Science और Technology का ज्ञान था?” कुछ लोग दावा करते हैं कि वेदों में पहले से ही

बुद्धि के छह स्तर - साधारण बुद्धि, मेधा, मनीषा, प्रतिभा, प्रज्ञा और ऋतम्भरा प्रज्ञा

आज का युग “Information Age” कहलाता है। इंटरनेट, AI, मोबाइल और सोशल मीडिया के कारण जानकारी का विस्फोट हो चुका है। आज किसी भी विद्यार्थी के पास हजारों पुस्तकों से

कर्म का विज्ञान आपकी जीवन जैसी है, वैसी क्यों है

कर्म2 months ago

प्रस्तावना: जीवन को समझने का सही दृष्टिकोण मानव जीवन जितना सरल दिखाई देता है, उतना ही जटिल है। हम रोज़ अपने जीवन में अनेक घटनाओं का अनुभव करते हैं—कभी सफलता,

संक्रांति : वैदिक, खगोलीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

1. भूमिका : संक्रांति – पर्व नहीं, एक सिद्धांत भारतीय समाज में “संक्रांति” शब्द को प्रायः एक धार्मिक पर्व या फलित-ज्योतिषीय घटना के रूप में समझ लिया गया है। विशेष

वैदिक सिद्धांत के अनुसार मनुष्य का अवतरण वेद-उपनिषद के प्रमाणों सहित

मनुष्य की उत्पत्ति का प्रश्न केवल आधुनिक विज्ञान का नहीं है। यह प्रश्न वेदों, उपनिषदों और भारतीय दर्शनों में अत्यंत गंभीरता से उठाया गया है। आज प्रचलित विकासवाद (Evolution Theory)

भारतीय वैदिक परंपरा के अनेक विषय ऐसे हैं जिन्हें आज के समय में आधे ज्ञान और आधुनिक नैतिक दृष्टि से देखकर गलत समझ लिया गया है। नियोग क्रिया उनमें से

The Real Cause of Creation – Vedic Analysis

सृष्टि है क्यों? यह प्रश्न जितना प्राचीन है, उतना ही आधुनिक भी मनुष्य करोड़ों वर्षों से यह प्रश्न पूछता आ रहा है —“सृष्टि अस्तित्व में क्यों है? आखिर इसकी आवश्यकता

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