ऋषि, महर्षि, देवर्षि, ब्रह्मर्षि और मुनि में अंतर – वैदिक दृष्टिकोण
भारतीय वैदिक परंपरा में ज्ञान, तप और साधना के आधार पर ऋषियों को अलग-अलग श्रेणियों में बाँटा गया है। जब […]
भारतीय वैदिक परंपरा में ज्ञान, तप और साधना के आधार पर ऋषियों को अलग-अलग श्रेणियों में बाँटा गया है। जब […]
भारतीय ऋषियों ने जीवन को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने के लिए दिनचर्या (Daily Routine) और रात्रिचर्या (Night Routine) दोनों
आज के आधुनिक युग में मनुष्य ने विज्ञान और तकनीक के माध्यम से अद्भुत प्रगति की है — लेकिन क्या
भारतीय अध्यात्म में एक प्रश्न सदा से लोगों को उलझाता रहा है — “लोक” का अर्थ क्या है? क्या भूलोक,
भारतवर्ष की पहचान सदैव उसके ज्ञान और संस्कृति से रही है। इस पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने में गुरु-शिष्य परंपरा
भारतवर्ष की राजनीति सदैव धर्म से पोषित रही है। ‘धर्म’ केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन पद्धति और नीति का आधार
वर्तमान भारतीय समाज की सबसे बड़ी कमजोरी जातिवाद है। यह विडंबना ही है कि जिसने संसार को वेद, उपनिषद, शास्त्र
आज के समाज में जातिवाद एक ऐसी सामाजिक कुरीति बन चुका है, जिसने एकता और वैदिक मूल्यों को गहरा आघात
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – सनातन जीवन दर्शन का आधार सनातन धर्म में जीवन को केवल एक सांसारिक यात्रा
मानव जीवन में भावनाएँ और वासनाएँ स्वाभाविक हैं, किंतु जब ये अनियंत्रित हो जाती हैं, तो व्यक्ति आध्यात्मिक दृष्टि से
वेद मानवता के प्राचीनतम ग्रंथ हैं, जिनमें न केवल आध्यात्मिक ज्ञान है, अपितु एक संतुलित समाज निर्माण की संपूर्ण रूपरेखा
“वेद” – एक ऐसा शब्द जो केवल ग्रंथों का नाम नहीं, बल्कि ब्रह्माण्ड के मूल नियमों, चेतना, ध्वनि और ऊर्जा