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बुद्धि के छह स्तर - साधारण बुद्धि, मेधा, मनीषा, प्रतिभा, प्रज्ञा और ऋतम्भरा प्रज्ञा

बुद्धि के छह स्तर - साधारण बुद्धि, मेधा, मनीषा, प्रतिभा, प्रज्ञा और ऋतम्भरा प्रज्ञा

आज का युग “Information Age” कहलाता है। इंटरनेट, AI, मोबाइल और सोशल मीडिया के कारण जानकारी का विस्फोट हो चुका है। आज किसी भी विद्यार्थी के पास हजारों पुस्तकों से

कर्म का विज्ञान आपकी जीवन जैसी है, वैसी क्यों है

कर्म1 week ago

कर्म का विज्ञान: सफल जीवन के वैदिक सूत्र

प्रस्तावना: जीवन को समझने का सही दृष्टिकोण मानव जीवन जितना सरल दिखाई देता है, उतना ही जटिल है। हम रोज़ अपने जीवन में अनेक घटनाओं का अनुभव करते हैं—कभी सफलता,

संक्रांति : वैदिक, खगोलीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

संक्रांति : वैदिक, खगोलीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

1. भूमिका : संक्रांति – पर्व नहीं, एक सिद्धांत भारतीय समाज में “संक्रांति” शब्द को प्रायः एक धार्मिक पर्व या फलित-ज्योतिषीय घटना के रूप में समझ लिया गया है। विशेष

वैदिक सिद्धांत के अनुसार मनुष्य का अवतरण वेद-उपनिषद के प्रमाणों सहित

वैदिक सिद्धांत के अनुसार मनुष्य का अवतरण: वेद-उपनिषद के प्रमाणों सहित

मनुष्य की उत्पत्ति का प्रश्न केवल आधुनिक विज्ञान का नहीं है। यह प्रश्न वेदों, उपनिषदों और भारतीय दर्शनों में अत्यंत गंभीरता से उठाया गया है। आज प्रचलित विकासवाद (Evolution Theory)

नियोग क्या है? वैदिक सनातन धर्म में नियोग की शास्त्रीय व्याख्या

भारतीय वैदिक परंपरा के अनेक विषय ऐसे हैं जिन्हें आज के समय में आधे ज्ञान और आधुनिक नैतिक दृष्टि से देखकर गलत समझ लिया गया है। नियोग क्रिया उनमें से

The Real Cause of Creation – Vedic Analysis

सृष्टि का वास्तविक कारण — वैदिक विश्लेषण

सृष्टि है क्यों? यह प्रश्न जितना प्राचीन है, उतना ही आधुनिक भी मनुष्य करोड़ों वर्षों से यह प्रश्न पूछता आ रहा है —“सृष्टि अस्तित्व में क्यों है? आखिर इसकी आवश्यकता

भारत की महान वैदिक परंपरा में शास्त्रों का स्थान सर्वोपरि है। वेद, उपनिषद, स्मृतियाँ, और अन्य धर्मग्रंथ न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन को दिशा देने वाले अमूल्य

मनुस्मृति में प्रक्षिप्त (मिलावट) का समाधान

मनुस्मृति प्राचीन भारतीय धर्मशास्त्रों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित ग्रंथ है, जिसे “धर्मशास्त्रों का आधार” माना जाता है। हालांकि इसे महर्षि मनु के नाम से जाना जाता है, परंतु

वैदिक दृष्टि में साधना और सिद्धि का संबंध

वैदिक सनातन धर्म में साधना और सिद्धि आत्मिक उत्थान के दो महत्त्वपूर्ण अंग हैं। साधना (आध्यात्मिक अभ्यास) का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और ब्रह्म से एकात्मता प्राप्त करना है। सिद्धि,

आज की नई पीढ़ी एक तेज़ी से बदलती दुनिया में जी रही है, जहाँ तकनीक, भौतिकता, और आधुनिकता ने जीवन को सरल और जटिल दोनों बना दिया है। ऐसे में

सनातन धर्म में अन्न, जल और भोजन का आध्यात्मिक महत्व

सनातन धर्म केवल एक धार्मिक पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पूर्ण विज्ञान और दर्शन है। इसके हर पहलू में व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने

gyaan_aur_vigyaan_mein_kya_antar_hai

वेदों के दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण में ज्ञान और विज्ञान दोनों ही महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ये दोनों शब्द अपने-अपने क्षेत्रों में गहन अर्थ रखते हैं और मानव जीवन के

धार्मिक-कर्मकांड-और-उसका-वैज्ञानिक-आधार

धार्मिक कर्मकांड, जो प्राचीन समय से भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रहे हैं, आज भी विभिन्न धार्मिक और सामाजिक अवसरों पर संपन्न किए जाते हैं। इन्हें अक्सर रूढ़ियों या परंपराओं

आज के युग में वैदिक धर्म का पालन कैसे करें

आज का युग तकनीकी, भौतिकता और आधुनिकता से भरा हुआ है। ऐसे समय में, वैदिक धर्म का पालन करना चुनौतीपूर्ण लग सकता है। वैदिक धर्म, जिसे सनातन धर्म भी कहा

मानव सभ्यता के विकास में विज्ञान का योगदान अविस्मरणीय है। विज्ञान ने हमारे जीवन को अनेक रूपों में सरल, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया है। लेकिन, जब हम विज्ञान की बात

Ayurvedic Routine Daily Habits for a Healthy and Balanced Life

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, हम में से कई लोग तनाव और बीमारियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक दिनचर्या को अपनाना न केवल हमारे शरीर बल्कि

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