वेदों की समाज व्यवस्था: उद्देश्य, प्रकार और महत्व
वेद मानवता के प्राचीनतम ग्रंथ हैं, जिनमें न केवल आध्यात्मिक ज्ञान है, अपितु एक संतुलित समाज निर्माण की संपूर्ण रूपरेखा […]
वेद मानवता के प्राचीनतम ग्रंथ हैं, जिनमें न केवल आध्यात्मिक ज्ञान है, अपितु एक संतुलित समाज निर्माण की संपूर्ण रूपरेखा […]
महान व्यक्तित्व वह नहीं जो धन, बल या प्रसिद्धि से परिभाषित हो, बल्कि वह है जिसमें मानवीय गुणों की सच्ची
मानव समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए दुष्टों का दमन आवश्यक है। सनातन धर्म के ग्रंथों में
मनुष्य के जीवन में संघर्ष और विरोधाभास सदैव विद्यमान रहते हैं। चाहे वह राजनीति हो, व्यापार हो, या पारिवारिक जीवन,
सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक धर्म है। जिसने न केवल भारत को बल्कि सम्पूर्ण विश्व को धर्म,
आज का युग वह समय है जब सनातन धर्म पर आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं।
महिलाओं का मासिक धर्म या रजस्वला केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह ऊर्जा, तरंगों और सृजनात्मक शक्ति का गहन
सनातन धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों में विभाजित किया गया है – ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। इनमें
आज का युग भौतिक प्रगति और तकनीकी विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है, लेकिन इसके साथ नैतिक मूल्यों
दु:ख और सुख जीवन के दो पहलू हैं, लेकिन दु:खों का अनुभव अधिक गहरा और पीड़ादायक होता है। हर व्यक्ति
शिक्षा मनुष्य के विकास का आधार है। यह केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के चारित्रिक,
जन्म और मृत्यु, ये दोनों ही जीवन के ऐसे सत्य हैं जो प्रत्येक प्राणी के जीवन चक्र का हिस्सा हैं।