महान व्यक्तित्व वह नहीं जो धन, बल या प्रसिद्धि से परिभाषित हो, बल्कि वह है जिसमें मानवीय गुणों की सच्ची समझ और अभिव्यक्ति हो। संस्कृत साहित्य और भारतीय दर्शन में
महान व्यक्तित्व वह नहीं जो धन, बल या प्रसिद्धि से परिभाषित हो, बल्कि वह है जिसमें मानवीय गुणों की सच्ची समझ और अभिव्यक्ति हो। संस्कृत साहित्य और भारतीय दर्शन में
मानव समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए दुष्टों का दमन आवश्यक है। सनातन धर्म के ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि दुष्टों को क्षमा करना या उन्हें
मनुष्य के जीवन में संघर्ष और विरोधाभास सदैव विद्यमान रहते हैं। चाहे वह राजनीति हो, व्यापार हो, या पारिवारिक जीवन, विवादों का समाधान करने के लिए विभिन्न नीतियों का प्रयोग
आजकल संप्रदायों और विभिन्न मतमतांतरों ने धर्म शब्द का व्यापक रूप से दुरुपयोग किया है, जिसके परिणामस्वरूप धर्म के नाम पर अनेक झगड़े हो रहे हैं। यह प्रश्न उठता है
सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक धर्म है। जिसने न केवल भारत को बल्कि सम्पूर्ण विश्व को धर्म, नीति, आत्मज्ञान और सहिष्णुता का मार्ग दिखाया। किन्तु आज जब
आज का युग वह समय है जब सनातन धर्म पर आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं। भारत जहां कभी धर्म, संस्कृति और साधना का गढ़ था,
वर्तमान युग में जब धर्म पर तरह-तरह के प्रश्न उठते हैं, तो एक गंभीर और बुनियादी प्रश्न यह भी होता है — “शास्त्र प्रमाण का क्या अर्थ है?” और “क्यों
महिलाओं का मासिक धर्म या रजस्वला केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह ऊर्जा, तरंगों और सृजनात्मक शक्ति का गहन मिश्रण है। यह प्रक्रिया न केवल स्त्री के शारीरिक चक्र
होली केवल रंगों और उमंग का पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीनतम वैदिक परंपराओं में से एक महत्वपूर्ण यज्ञ पर्व भी है। आजकल कुछ लोग, यह तर्क देते
सनातन धर्म अत्यंत व्यापक और गूढ़ दर्शन से युक्त है, जिसमें साधना के अनेक मार्ग उपलब्ध हैं। हर व्यक्ति अपनी प्रवृत्ति, संस्कार, और जीवन-परिस्थितियों के अनुसार साधना का चयन करता







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Amit vyas: आपके कार्य को नमन गुरुजी🙏