शिक्षा” (Education) और “ज्ञान” (Knowledge) — दोनों शब्द सुनने में समान लगते हैं, परंतु वैदिक दृष्टि से इनका अर्थ, उद्देश्य और प्रभाव में गहरा अंतर है। आज के युग में
शिक्षा” (Education) और “ज्ञान” (Knowledge) — दोनों शब्द सुनने में समान लगते हैं, परंतु वैदिक दृष्टि से इनका अर्थ, उद्देश्य और प्रभाव में गहरा अंतर है। आज के युग में
आयुर्वेद, भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति, केवल रोगों के उपचार की विधि ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। इसमें मनुष्य को शरीर (शरीर-शास्त्र), मन (मनोविज्ञान), आत्मा (आध्यात्मिकता) और
आज जब दीपावली का पर्व आता है तो हर पंथ, हर सम्प्रदाय अपनी कल्पना के अनुसार कोई न कोई कथा जोड़ देता है।कोई कहता है — “श्रीरामचन्द्र जी आज के
भारतीय वैदिक परंपरा के अनेक विषय ऐसे हैं जिन्हें आज के समय में आधे ज्ञान और आधुनिक नैतिक दृष्टि से देखकर गलत समझ लिया गया है। नियोग क्रिया उनमें से
सृष्टि है क्यों? यह प्रश्न जितना प्राचीन है, उतना ही आधुनिक भी मनुष्य करोड़ों वर्षों से यह प्रश्न पूछता आ रहा है —“सृष्टि अस्तित्व में क्यों है? आखिर इसकी आवश्यकता
मनुष्य की उत्पत्ति का प्रश्न केवल आधुनिक विज्ञान का नहीं है। यह प्रश्न वेदों, उपनिषदों और भारतीय दर्शनों में अत्यंत गंभीरता से उठाया गया है। आज प्रचलित विकासवाद (Evolution Theory)
1. भूमिका : संक्रांति – पर्व नहीं, एक सिद्धांत भारतीय समाज में “संक्रांति” शब्द को प्रायः एक धार्मिक पर्व या फलित-ज्योतिषीय घटना के रूप में समझ लिया गया है। विशेष
प्रस्तावना: जीवन को समझने का सही दृष्टिकोण मानव जीवन जितना सरल दिखाई देता है, उतना ही जटिल है। हम रोज़ अपने जीवन में अनेक घटनाओं का अनुभव करते हैं—कभी सफलता,
आज के समय में एक अत्यंत चर्चित प्रश्न है— “क्या वेदों में आधुनिक Science और Technology का ज्ञान था?” कुछ लोग दावा करते हैं कि वेदों में पहले से ही
आज का युग “Information Age” कहलाता है। इंटरनेट, AI, मोबाइल और सोशल मीडिया के कारण जानकारी का विस्फोट हो चुका है। आज किसी भी विद्यार्थी के पास हजारों पुस्तकों से







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Amit vyas: आपके कार्य को नमन गुरुजी🙏