वेद मानवता के प्राचीनतम ग्रंथ हैं, जिनमें न केवल आध्यात्मिक ज्ञान है, अपितु एक संतुलित समाज निर्माण की संपूर्ण रूपरेखा भी है। वेदों में वर्णित समाज व्यवस्था मात्र एक वर्गीकरण
वेद मानवता के प्राचीनतम ग्रंथ हैं, जिनमें न केवल आध्यात्मिक ज्ञान है, अपितु एक संतुलित समाज निर्माण की संपूर्ण रूपरेखा भी है। वेदों में वर्णित समाज व्यवस्था मात्र एक वर्गीकरण
महान व्यक्तित्व वह नहीं जो धन, बल या प्रसिद्धि से परिभाषित हो, बल्कि वह है जिसमें मानवीय गुणों की सच्ची समझ और अभिव्यक्ति हो। संस्कृत साहित्य और भारतीय दर्शन में
मानव समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए दुष्टों का दमन आवश्यक है। सनातन धर्म के ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि दुष्टों को क्षमा करना या उन्हें
मनुष्य के जीवन में संघर्ष और विरोधाभास सदैव विद्यमान रहते हैं। चाहे वह राजनीति हो, व्यापार हो, या पारिवारिक जीवन, विवादों का समाधान करने के लिए विभिन्न नीतियों का प्रयोग
सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक धर्म है। जिसने न केवल भारत को बल्कि सम्पूर्ण विश्व को धर्म, नीति, आत्मज्ञान और सहिष्णुता का मार्ग दिखाया। किन्तु आज जब
आज का युग वह समय है जब सनातन धर्म पर आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं। भारत जहां कभी धर्म, संस्कृति और साधना का गढ़ था,
महिलाओं का मासिक धर्म या रजस्वला केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह ऊर्जा, तरंगों और सृजनात्मक शक्ति का गहन मिश्रण है। यह प्रक्रिया न केवल स्त्री के शारीरिक चक्र
सनातन धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों में विभाजित किया गया है – ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। इनमें से गृहस्थ आश्रम सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यही
आज का युग भौतिक प्रगति और तकनीकी विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है, लेकिन इसके साथ नैतिक मूल्यों का पतन भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
दु:ख और सुख जीवन के दो पहलू हैं, लेकिन दु:खों का अनुभव अधिक गहरा और पीड़ादायक होता है। हर व्यक्ति अपने जीवन में किसी न किसी प्रकार के दु:ख का







Rashmi: Excellent. Will definitely join.
Dr. Jhumsor Rime: 1st time in life got this certain knowledge about Sanatani, it's philosophy n its way of life
Ishmohan naithani: Praise worthy
Rashmi: Acharya ji ne saral bhasha me vishya ka varnan kiya hai.Vyakti ke sarvanheen vikas guru ke saniddhy me rahne se hi sambhav hai.Gurukul aaj ki bhanti paisa kamane ka sadhan nahi the. Guru ka achran bhi anukarniy hota tha Aaj ki shiksha paddhati me aur prachin paddhati me antar spasht hai